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नजर में अहंकार: क्यों ‘द इकॉनमिस्ट’ भारत की सोच को समझ नहीं पाया
लेखक: डॉ. विनय नलवा दुनिया के मीडिया में एक पैटर्न दिख रहा है। भारत में आत्मविश्वास दिखे तो उसे बहुसंख्यकवाद कहा जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा की बात हो तो उसे प्रचार बता दिया जाता है और हाल ही में पत्रिका द इकॉनमिस्ट ने फिल्म धुरंधर: द रिवेंज पर एक लेख लिखा जिसका इसका शीर्षक था - क्या यह फिल्म नरेंद्र मोदी के लिए प्रचार है? यह सिर्फ फिल्म की समीक्षा नहीं है। यह भारतीय समाज को एक नजर से आंकने की कोशिश है। लेख की शुरुआत अजीब तुलना से होती है। लेख में फिल्म देखने के अनुभव को नशे ज
GHTN Admin
8 अप्रैल3 मिनट पठन
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